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Saturday, January 16, 2010

क्या फ़ालतू की बात करते हो!!!

(बुरे खयालात और अच्छे ख्यालात में जंग होने लगी तो कुछ टूटता फूटा लिख डाला)

फुरसत नहीं मोहब्बत करने से |
आप नफरत करने की बात करते हो||
पाक ख़यालों की सोहबत से फुर्सत नहीं|
द्वेष को आप आत्मसात करते हो||

तोड़ने की कोशिश में हूँ मजहबी दायरे |
आप दरो दीवार की बात करते हो||
मशगुल हूँ मैं दिलों के जख्म सीने में|
आप चाके दिल करने बात करते हो ||

मैं चैनो अमन का पुजारी हूँ|
आप हुडदंग करने की बात करते हो||
मैं मेल मिलाप की बात करता हूँ|
आप हमेशां अलगाववाद करते हो||

आप हमेशां खुनी खंजर लिए फिरते हो|
इंसानियत पर आघात करते हो||
तुम किसी मजहब के नहीं फिर भी,
ना जाने कौन से मजहब की बात करते हो||

Wednesday, January 13, 2010

"टिप्पणियों के अभाव में" !!

मिलकर रहो क्या रखा है अलगाव में!!
दिल की सुनो मत बहको किसी के दबाव में!!
क्या हिन्दू, क्या मुस्लिम, सिक्ख ,इसाई क्या !!
इंसानियत का नाता हो आत्मा के लगाव में!!

प्रेम सोहार्द मिलते नहीं बाजार के भाव में !
भावनाओं को मत मारो खुदगर्जी के चाव में !!
जात पात घृणा नफरत तपते हुए सेहरा हैं !
सीतल प्रेम की छैंयाँ बैठो क्या रखा है ताव में!!


कहाँ किसी का भला हुआ आज तक टकराव में !
मनके मणके पिरो माला बनो क्या रखा बिखराव में !!
हर गहरा जख्म भर जाता है बोली का जख्म नहीं भरता !
मीठे बोल से सहद घोलो, दर्द बहुत है बोलों के घाव में !!

दम तोड़ देती हैं कलियाँ लापरवाही के रखरखाव में!
दया प्रेम ममता करुणा शामिल करलो स्वभाव में !!
यहाँ हर एक तुर्रम खान है यहाँ अपनी बिसात क्या!!
दम तोड़ देता है ब्लोगर धीरे धीरे "टिप्पणियों के अभाव में" !!










Monday, December 21, 2009

भारत में भारतीय ना मिला||

सांड खुला है खुला ही चरता है!
भारतीयता का दम भरता है ||

पर भारत में कोई भारतीय ना मिला|
अपना बना सकूँ ऐसा कोई आत्मीय न मिला ||

जिससे भी मिला मुझसे मेरा नाम पूछा |
सब मेरे नाम से डरे मेरा पता मेरा धाम पूछा ||

मैं भारतीय हूँ मैंने सबको बताया |
पर इतने से लोगों को रास ना आया ||

सभी मुझसे मजहब प्रांत और जात पूछते हैं |
मुझे राम रहीम दोनों प्यारे वो "एक" आधार पूछते हैं !!

कोई न बना मेरा क्यूंकि मुझे तो भारतीय चाहिए था |
न हिन्दू, न मुस्लिम, न सिख, न इसाई, कोई आत्मीय चाहिए था!!

कश्मीर में कश्मीरी, बंगाल में बंगाली,
बिहार में बिहारी, असाम में असामी मिला |
क्षेत्रवाद की घटिया मिली, मजहबों के दायरे मिले,
इतनी आवाम में मुझे भारत का एक आवामी न मिला ||


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